कुछ लोग सर्दियों के दौरान अक्सर आलस्य और थकान महसूस करते हैं! अगर आप भी उनमें से एक हैं, तो विंटर ब्लूज़ से छुटकारा पाने के लिए इन 9 योगासनों को आज़मा सकते हैं।
सर्दी अक्सर आरामदायक पलों और अप्रत्याशित मूड में गिरावट का मिश्रण लेकर आती है। छोटे दिन, लंबी रातें और ठंडा तापमान आपको धीमा, प्रेरणाहीन, या बिल्कुल भी निष्क्रिय महसूस करा सकते हैं। बहुत से लोग सर्दियों में उदासी का अनुभव करते हैं क्योंकि सूरज की रोशनी कम हो जाती है, दिनचर्या बदल जाती है और शरीर स्वाभाविक रूप से अधिक सुस्त हो जाता है। यदि आप सोच रहे हैं कि इससे कैसे छुटकारा पाया जाए, तो हल्के योगासन आपको मानसिक और शारीरिक रूप से हल्का महसूस करने में मदद कर सकते हैं। कुछ सचेत गतिविधियाँ रक्त प्रवाह में सुधार कर सकती हैं, तंग मांसपेशियों को आराम दे सकती हैं और आपके दिमाग को शांत कर सकती हैं। नियमित अभ्यास से, योग आपके मूड को बेहतर कर सकता है, तनाव कम कर सकता है और आपको पूरे सर्दियों में अधिक ऊर्जावान महसूस करने में मदद कर सकता है।
शीतकालीन ब्लूज़ के लिए योग मुद्राएँ
इस सर्दी के मौसम में तनाव को दूर करने और आपके मूड को बेहतर बनाने के लिए 9 योगासन:
1. काबरा पोज़िंग (भुजासन)
दिल खोल देने वाली यह मुद्रा रक्त परिसंचरण में सुधार करती है और छाती और रीढ़ की हड्डी में कठोरता को कम करती है। यह सर्दियों में होने वाली सुस्ती से निपटने, सांस लेने में सुधार और तनाव दूर करके मूड को बेहतर बनाने में भी मदद करता है। इस आसन को कैसे करें:
- अपने कंधों के नीचे हथेलियाँ रखकर अपने पेट के बल लेटें।
- अपनी कोहनियों को अपने शरीर के पास रखें।
- श्वास लें और अपनी छाती को धीरे से फर्श से ऊपर उठाएं।
- अपने कंधों को ढीला रखें और आगे की ओर देखें।
- कुछ सांसें रोकें, फिर धीरे-धीरे छोड़ें।
2. ब्रिज पोज़िंग (ऑर्मिश का प्रयोग करें)
ब्रिज पोज़ छाती को खोलते हुए पीठ, ग्लूट्स और पैरों को उत्तेजित करता है, जिससे तनाव और थकान को कम करने में मदद मिलती है। योग विशेषज्ञ हिमालयन सिद्ध अक्षर का कहना है कि यह बेहतर मुद्रा का भी समर्थन करता है, जो मूड और ऊर्जा प्रवाह को बढ़ाता है। इस आसन को कैसे करें:
- घुटनों को मोड़कर और पैरों को कूल्हे की चौड़ाई से अलग रखते हुए अपनी पीठ के बल लेटें।
- अपनी भुजाओं को अपने शरीर के पास रखें।
- अपने पैरों को फर्श पर दबाएं और अपने कूल्हों को ऊपर उठाएं।
- अपने शरीर के ऊपरी हिस्से को फैलाकर रखें और जांघों को समानांतर रखें।
- पकड़ें, फिर धीरे से नीचे करें।
3. हैप्पी बेबी पोज़ (आनंद बालासन)
यह चंचल मुद्रा पीठ के निचले हिस्से के दर्द से राहत दिलाती है और कूल्हों में तनाव दूर करती है। यह तंत्रिका तंत्र पर शांत प्रभाव डालता है, जिससे सर्दियों में होने वाली हल्की चिंता या चिड़चिड़ापन को कम करने में मदद मिलती है। इस आसन को कैसे करें:
- अपनी पीठ के बल लेट जाएं और अपने घुटनों को अपनी छाती की ओर मोड़ें।
- अपने पैरों के बाहरी किनारों को पकड़ें।
- अपने घुटनों को अपने धड़ से थोड़ा चौड़ा फैलाएं।
- धीरे से अगल-बगल हिलाएँ।
- गहरी सांस लें और आराम करें।
4. अधोमुखी कुत्ता (अधो मुख संवासन)
यह मुद्रा परिसंचरण को बढ़ाती है और हैमस्ट्रिंग, पीठ और कंधों को फैलाती है। यह सतर्कता बढ़ाता है और सुस्ती दूर करने में मदद करता है। इस आसन को कैसे करें:
- अपने हाथों और घुटनों से शुरुआत करें।
- उल्टे वी आकार बनाने के लिए कूल्हों को ऊपर उठाएं।
- एड़ियों को धीरे से फर्श की ओर दबाएं।
- अपनी रीढ़ की हड्डी को लंबा और कंधों को ढीला रखें।
- 5-7 सांसों तक रुकें।
5. योद्धा II (वीरभद्रासन II)
यह मुद्रा ताकत और आत्मविश्वास पैदा करती है, जो सर्दियों की मंदी को मात देने के लिए बहुत बढ़िया है। अक्षर का कहना है कि इस तरह खड़े होने की मुद्राएं मानसिक स्पष्टता और भावनात्मक स्थिरता को बढ़ावा देती हैं। इस आसन को कैसे करें:
- पैरों को फैलाकर खड़े रहें।
- दाएँ पैर को बाहर की ओर मोड़ें और दाएँ घुटने को मोड़ें।
- भुजाओं को फर्श के समानांतर फैलाएँ।
- अपने दाहिने हाथ पर नजर डालें.
- पकड़ो, फिर किनारे बदलो।
6. मछली मुद्रा (मत्स्यासन)
यह मुद्रा छाती और गले को फैलाती है, जिससे सांस लेने में सुधार होता है और थकान कम होती है। यह तंत्रिका तंत्र को उत्तेजित करके भावनात्मक कल्याण को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। इस आसन को कैसे करें:
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- पैरों को फैलाकर पीठ के बल लेटें।
- अपने हाथों को अपने कूल्हों के नीचे रखें।
- पीठ के ऊपरी हिस्से को झुकाते हुए अपनी छाती को ऊपर उठाएं।
- धीरे से अपना सिर पीछे झुकाएं।
- पकड़ें, फिर धीरे-धीरे छोड़ें।
7. ऊँट मुद्रा (उष्ट्रासन)
अक्षर बताते हैं, “यह गहरा बैकबेंड ऊर्जा बढ़ाता है और भावनात्मक तनाव को कम करता है। यह मुद्रा में सुधार और रक्त परिसंचरण को बढ़ावा देने में विशेष रूप से प्रभावी है, खासकर सर्दियों के महीनों के दौरान।” इस आसन को कैसे करें:
- घुटनों को कूल्हे-चौड़ाई से अलग रखते हुए घुटने टेकें।
- अपने हाथों को अपनी पीठ के निचले हिस्से पर रखें।
- पीछे झुकें और अपनी छाती खोलें।
- यदि आरामदायक हो तो अपनी एड़ियों को छूने के लिए पहुंचें।
- पकड़ें और धीरे-धीरे सांस लें।
8. वृक्षासन (वृक्षासन)
एक संतुलन मुद्रा जो मन को शांत करती है, फोकस में सुधार करती है और तनाव को कम करती है। यह उन दिनों में केंद्रित महसूस करने के लिए एक बेहतरीन मुद्रा है जब मस्तिष्क का कोहरा आपको थका हुआ महसूस कराता है। इस आसन को कैसे करें:
- लंबे समय तक खड़े रहें और वजन को एक पैर पर स्थानांतरित करें।
- दूसरे पैर को अपनी पिंडली या जांघ पर रखें।
- हथेलियों को अपनी छाती से जोड़ लें।
- अपनी दृष्टि स्थिर रखें.
- पकड़ो, फिर किनारे बदलो।
9. बच्चे की मुद्रा (बालासन)
एक सौम्य पुनर्स्थापनात्मक मुद्रा जो मन को शांत करती है और पूरे शरीर को आराम देती है। यह पीठ के निचले हिस्से के तनाव को दूर करता है और गहरी सांस लेने को बढ़ावा देता है, जिससे यह तनाव को शांत करने के लिए आदर्श बन जाता है। इस आसन को कैसे करें:
- घुटने टेकें और अपनी एड़ियों पर वापस बैठें।
- अपने धड़ को आगे की ओर नीचे करें।
- अपनी बाहों को आगे फैलाएं या उन्हें अपनी तरफ रखें।
- अपने माथे को चटाई पर टिकाएं।
- गहरी सांस लें और आराम करें।
इन योग मुद्राओं से आप तनाव को प्रबंधित करने और ऊर्जावान बने रहने में सक्षम होंगे!
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